Mahabodhi: Mukti Kis Raah Se?
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‘वर्तमान युग यह प्रति-क्रांति का युग है’ ऐसा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर कहते है। लेकिन बौद्धों ने सुविधाजनक रूप से उसे भूला दिया है। इसकी वजह बौद्धों की चुनिंदा तथा बिखरी हुई सक्रियता है। बौद्ध धर्म के विरुद्ध प्रतिक्रांति के युद्ध को जारी रखने के लिए ब्राह्मणवादी बाशिंदे वर्तमान में भी उतने ही सक्रिय हैं, जितने वे अतीत में थे। लेकिन बाबासाहेब द्वारा दिए गयी सार-गर्भित चेतावनी को अनदेखा करते हुए आज के बौद्ध वर्तमान में महज़ विरोध आंदोलन तथा सत्याग्रह इन अराजकता के व्याकरण को अपना रहे हैं। दुश्मन को दोष देकर बौद्ध अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। अपने शत्रुओं को चालाक, अनैतिक के रूप में प्रस्तुत कर हम न्यायी, समतावादी होने का ढिंढोरा पिट सकते हैं। लेकिन यह महज़ पलायनवाद है; खोखला आदर्शवाद है। क्योंकि इससे एक आत्म-दयामूलक दृष्टिकोण विकसित होता है।
Description
Product details
ISBN: 978-81-990066-8-3
Publisher : ASHTVINAY PRAKASHAN; 1st edition (17 Sep 2025)
Language : Hindi
Hardcover : 56 pages
Item Weight : 70 g
Dimensions : 22 x 14 x 0.5 cm
Country of Origin : India
Importer : ASHTVINAY PRAKASHAN
Packer : ASHTVINAY PRAKASHAN
Generic Name : Book
Author: Dr.Vinod Anavrat









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