Ashok Vijayadashmi Ka Bhramjal
₹150.00बौद्धजनों के लिए 1956 के अक्टूबर माह की दीक्षा की तारीख तथा ईसा पूर्व 260 की अश्विन शुद्ध दशमी (तिथि) यह दोनों घटनाएं ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है. उन दोनों का पृथक अस्तित्व बनाए रखना ही जरूरी था. किंतु वैसे ना करते हुए 1957 के पश्चात अनावश्यक रूप से उनकी मिलावट की गई. ऐसा करते हुए उलझने बढ़ाने में खलनायकी भूमिका किसने निभाई है? इस ओर अक्षम्य में रूप से उपेक्षा की गई. नतीजतन मिलावट के इस गड़बड़ी में ‘अश्विन शुद्ध दशमी मतलब विजयादशमी मतलब की बाबासाहब की पिक्षा’ इस अभिनव संयोजन को बड़े पैमाने में कैसी मुक सहमती दी गई की भनक भी नहीं लगी.








